11 August 2017 murli

Hindi

“मीठे बच्चे – जब तक जीना है पवित्रता का व्रत पक्का रखना है क्योंकि यह अन्तिम जन्म है, पवित्र बनकर पवित्र दुनिया में जाना है”
प्रश्न:- बाप का प्यार वा अधिकार किन बच्चों पर रहता है?
उत्तर:- जो अच्छी रीति पढ़ते और पढ़ाते हैं, सबूत देते हैं। उन पर बाप का सबसे अधिक प्यार रहता है। जो अच्छी रीति पढ़ने वाले हैं वही माला में पिरोयेंगे।
प्रश्न:- भविष्य देव पद प्राप्त करने के लिए अपनी कौन सी जांच करनी है?
उत्तर:- जांच करो दैवी गुण धारण करने में कौन-कौन से विघ्न आते हैं, उन विघ्नों को युक्ति से उड़ाना है। अपने को देखना है हम पावन कहाँ तक बने हैं! कोई भी कांटा रूकावट तो नहीं डालता!
गीत:- छोड़ भी दे आकाश सिंहासन…
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) गृहस्थ व्यवहार में रहते हुए कमल फूल समान रहना है। जब तक जीना है पवित्रता का व्रत जरूर रखना है।
2) कृपा मांगने के बजाए मात-पिता को फालो करना है। पढ़ाई ध्यान से पढ़नी और पढ़ानी है।
वरदान:- अमृतवेले अपने मस्तक पर विजय का तिलक लगाने वाले स्वराज्य अधिकारी सो विश्व राज्य अधिकारी भव
रोज़ अमृतवेले अपने मस्तक पर विजय का तिलक अर्थात् स्मृति का तिलक लगाओ। भक्ति की निशानी तिलक है और सुहाग की निशानी भी तिलक है, राज्य प्राप्त करने की निशानी भी राजतिलक है। कभी कोई शुभ कार्य में सफलता प्राप्त करने जाते हैं तो जाने के पहले तिलक देते हैं। आप सबको भी बाप के साथ का सुहाग है इसलिए अविनाशी तिलक है। अभी स्वराज्य के तिलकधारी बनो तो भविष्य में विश्व के राज्य का तिलक मिल जायेगा।
स्लोगन:- ज्ञान, गुण और शक्तियों का दान करना ही महादान है।

 

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