15 August 217 Murli

English

Essence: Sweet children, you have now received the light of understanding of the beginning, the middle and the end of the entire world. Keep this knowledge in your intellects and remain constantly cheerful.

Question: Which great fortune are you children making for yourselves, and how?
Answer: By following shrimat you claim the unlimited inheritance from the Father for 21 births. By following shrimat all your desires are fulfilled. This is your great fortune. You children, who go through the cycle of 84 births, have now become Brahmins and will later become deities. An elevated fortune is made when you conquer Maya, Ravan, with the power of your intellect’s yoga and with the power of knowledge. It is in your intellects that you have come to the Father to make your fortune, that is, to claim the status of Lakshmi or Narayan.

Song: My fortune having awakened I have come.

Essence for dharna: 
1. In order to become multimillionaires, earn a true income. Don’t make excuses and say that you don’t have time to study. You must definitely study every day.
2. Stay in the unadulterated remembrance of the one Father and make the soul satopradhan. “Mine is one Shiv Baba and none other.” Make this lesson firm.

Blessing: May you be one with determination and give an experience of the canopy of protection by surrounding yourself with pure thoughts.
One pure, elevated and powerful thought of yours can perform many wonders. The bond of pure thoughts and of surrounding yourself with pure thoughts becomes a canopy of protection for weak souls and this becomes a means of safety or fortress for them. It is just that in your practising this, some battling first takes place, because waste thoughts cut off your pure thoughts. However, if you have determination and your Companion is the Father Himself, you constantly have a tilak of victory. Simply let this emerge and anything wasteful will automatically become merged.

Slogan: In order to grant a vision of your angelic form, practise remaining detached from the body.

Hindi

“मीठे बच्चे – अभी तुम्हें सारे विश्व के आदि-मध्य-अन्त की रोशनी मिली है, तुम ज्ञान को बुद्धि में रख सदा हर्षित रहो”
प्रश्न:- अभी तुम बच्चों की बहुत जबरदस्त तकदीर बन रही है – कौन सी और कैसे?
उत्तर:- अभी तुम श्रीमत पर चल 21 जन्मों के लिए बाप से बेहद का वर्सा ले रहे हो। श्रीमत पर तुम्हारी सब मनोकामनायें पूरी हो रही हैं, यह तुम्हारी जबरदस्त तकदीर है। तुम 84 जन्म लेने वाले बच्चे ही चक्र लगाकर अभी ब्राह्मण बने हो फिर देवता बनेंगे। ऊंची तकदीर तब बनती है जब बुद्धियोग बल और ज्ञान बल से माया रावण पर जीत पाते हो। तुम्हारी बुद्धि में है कि हम बाप के पास आये हैं अपनी तकदीर बनाने अर्थात् लक्ष्मी-नारायण पद पाने।
गीत:- तकदीर जगाकर आई हूँ….
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) पदमापदमपति बनने के लिए सच्ची कमाई करनी है। पढ़ाई में समय का बहाना नहीं देना है। ऐसे नहीं पढ़ाई के लिए फुर्सत नहीं। रोज़ पढ़ना जरूर है।
2) एक बाप की अव्यभिचारी याद में रह आत्मा को सतोप्रधान बनाना है। मेरा तो एक शिवबाबा, दूसरा न कोई.. यही पाठ पक्का करना है।
वरदान:- शुद्ध संकल्पों के घेराव द्वारा सदा छत्रछाया की अनुभूति करने, कराने वाले दृढ़ संकल्पधारी भव
आपका एक शुद्ध वा श्रेष्ठ शक्तिशाली संकल्प बहुत कमाल कर सकता है। शुद्ध संकल्पों का बंधन वा घेराव कमजोर आत्माओं के लिए छत्रछाया बन, सेफ्टी का साधन वा किला बन जाता है। सिर्फ इसके अभ्यास में पहले युद्ध चलती है, व्यर्थ संकल्प शुद्ध संकल्पों को कट करते हैं लेकिन यदि दृढ़ संकल्प करो तो आपका साथी स्वयं बाप है, विजय का तिलक सदा है ही सिर्फ इसको इमर्ज करो तो व्यर्थ स्वत: मर्ज हो जायेगा।
स्लोगन:- फरिश्ते स्वरूप का साक्षात्कार कराने के लिए शरीर से डिटैच रहने का अभ्यास करो।

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