03 September 2015 Murli

English

Essence: Sweet children, the Father has come to remove everyone’s sorrow and give them happiness. Therefore, since you are the children of the Remover of Sorrow, you mustn’t cause anyone sorrow.
Question: What are the main signs of the children who are to claim an elevated status?
Answer: 1) They always follow shrimat.
2) They are never stubborn about anything.
3) They study by themselves and gallop ahead to give themselves a tilak of sovereignty.
4) They never cause themselves a loss.
5) They are merciful and benevolent to everyone. They are very interested in doing service.
6) They do not perform any degraded action. They do not fight or quarrel.

Song: You wasted the night in sleeping and the day in eating.

Essence for dharna:
1. Remain very simple and ordinary at this confluence age because this is the time to remain in exile. Don’t have any expectations here. Never take the law into your own hands. Never fight or quarrel.
2. In order to establish the new kingdom before destruction takes place, give everyone the Father’s message: “The Father says: Remember Me and your sins will be absolved and you will become pure.”

Blessing: May you be a true server who progresses in service through self-progress.
Self-progress is the special basis of service progressing. If there is little self-progress, there will be little service. Service is not just giving someone an introduction through words, but to inspire someone to perform elevated deeds through your deeds is also service. Those who are constantly engaged in service through their thoughts, words and deeds experience elevated fortune through service. To the extent that they serve, accordingly they make progress. Those who serve through their elevated deeds constantly continue to attain the practical fruit.

Slogan: In order to come close, let your thinking, speaking and doing be equal.

Hindi

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – बाप आये हैं सबके दु:ख हर कर सुख देने, इसलिए तुम दु:ख हर्ता के बच्चे किसी को भी दु:ख मत दो”
प्रश्न:- ऊंच पद पाने वाले बच्चों की मुख्य निशानी क्या होगी?
उत्तर:- 1- वे सदा श्रीमत पर चलते रहेंगे। 2- कभी हठ नहीं करेंगे। 3- अपने को आपेही राजतिलक देने के लिए पढ़ाई पढ़कर गैलप करेंगे। 4- अपने को कभी घाटा नहीं डालेंगे। 5- सर्व प्रति रहमदिल और कल्याणकारी बनेंगे। उन्हें सर्विस का बहुत शौक होगा। 6- कोई भी तुच्छ काम नहीं करेंगे। लड़ेंगे-झगड़ेंगे नहीं।
गीत:- तूने रात गंवायी सो के……..
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) संगम पर बहुत सिम्पुल साधारण रहना है क्योंकि यह वनवाह में रहने का समय है। यहाँ कोई भी आश नहीं रखनी है। कभी अपने हाथ में लॉ नहीं लेना है। लड़ना-झगड़ना नहीं है।
2) विनाश के पहले नई राजधानी स्थापन करने के लिए सबको बाप का पैगाम देना है कि बाप कहते हैं मुझे याद करो तो विकर्म विनाश हों और तुम पावन बनो।
वरदान:- स्व-उन्नति द्वारा सेवा में उन्नति करने वाले सच्चे सेवाधारी भव
स्व-उन्नति सेवा की उन्नति का विशेष आधार है। स्व-उन्नति कम है तो सेवा भी कम है। सिर्फ किसी को मुख से परिचय देना ही सेवा नहीं है लेकिन हर कर्म द्वारा श्रेष्ठ कर्म की प्रेरणा देना यह भी सेवा है। जो मन्सा-वाचा-कर्मणा सदा सेवा में तत्पर रहते हैं उन्हें सेवा द्वारा श्रेष्ठ भाग्य का अनुभव होता है। जितनी सेवा करते उतना स्वयं भी आगे बढ़ते हैं। अपने श्रेष्ठ कर्म द्वारा सेवा करने वाले सदा प्रत्यक्षफल प्राप्त करते रहते हैं।
स्लोगन:- समीप आने के लिए सोचना-बोलना और करना समान बनाओ।

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