27 July2016 Murli

English

Essence: Sweet children, the old tree is to be destroyed in this Mahabharat War. Therefore, claim your full inheritance from the Father before the war takes place.

Question: Baba wants a gathering of mothers, but what speciality should that group have?
Answer: It should be a gathering that makes full effort to remain soul conscious. They should have the firm faith that they have to become pure and make the world pure. They mustn’t become impure. Only when the group is that of destroyers of attachment can they show wonders. There should be no attachment to anyone. Strings of attachment cause a lot of loss.

Essence for dharna:
1. Study and earn an income for 21 births while in that old body. Look after it but let there not be any strings of attachment to it.
2. Practise so that at the end you only remember Shiv Baba. Do not get caught up in thinking about anything else. Bring benefit to yourself.

Blessing: May you be a master seed who stays in the stage of being beyond sound and experiences all virtues.
Just as a whole tree is merged in a seed, similarly, by being in the stage beyond sound, you are able to experience all the special virtues of the confluence age. To be a master seed does not mean just to be peaceful, but, as well as peace, you also experience the main virtues of knowledge, supersensuous joy, love, bliss, power etc. It is not just yourself who experiences these, but other souls also experience all of these virtues from your face. All virtues are merged in the one virtue.

Slogan: Imbibe the goodness, but do not be influenced by the goodness.

Hindi

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – इस महाभारत लड़ाई में पुराना झाड समाप्त होना है इसलिए लड़ाई के पहले बाप से पूरा-पूरा वर्सा ले लो”
प्रश्न:- बाबा को माताओं का संगठन चाहिए लेकिन उस संगठन की विशेषता क्या हो?
उत्तर:- ऐसा संगठन हो जो देही-अभिमानी रहने का पूरा-पूरा पुरूषार्थ करे। जिन्हें पक्का नशा हो कि हमें पावन बन पावन दुनिया बनानी है। पतित नहीं बनना है। नष्टोमोहा ग्रुप हो तब कोई कमाल करके दिखाये। किसी में भी रग नहीं होनी चाहिए। मोह की रग बहुत नुकसान कर देती है।
धारणा के लिए मुख्य सार :-
1) इस पुराने शरीर में रहते पढ़ाई पढ़कर 21 जन्मों के लिए कमाई करनी है इसलिए इसकी सम्भाल करनी है। बाकी इसमें रग नहीं रखनी है।
2) ऐसा अभ्यास करना है जो अन्तकाल में एक शिवबाबा ही याद रहे। दूसरे किसी भी चिंतन में नहीं जाना है। अपना कल्याण करना है।
वरदान:- आवाज से परे की स्थिति में स्थित हो सर्व गुणों का अनुभव करने वाले मा. बीजरूप भव
जैसे बीज में सारा वृक्ष समाया हुआ होता है वैसे ही आवाज से परे की स्थिति में संगमयुग के सर्व विशेष गुण अनुभव में आते हैं। मास्टर बीजरूप बनना अर्थात् सिर्फ शान्ति नहीं लेकिन शान्ति के साथ ज्ञान, अतीन्द्रिय सुख, प्रेम, आनंद, शक्ति आदि-आदि सर्व गुख्य गुणों का अनुभव करना। यह अनुभव सिर्फ स्वयं को नहीं होता लेकिन अन्य आत्मायें भी उनके चेहरे से सर्वगुणों का अनुभव करती हैं। एक गुण में सर्वगुण समाये हुए रहते हैं।
स्लोगन:- अच्छाई धारण करो लेकिन अच्छाई में प्रभावित नहीं हो जाओ।

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