27 June 2016 Murli

English

Essence: Sweet children, the Father has come to extinguish the fire of vices that are burning throughout the whole world and to make everyone cool. The rain of knowledge makes you cool.

Question: Which fire is burning the whole world?
Answer: The fire of the vice of lust is burning the whole world. Everyone has become ugly by burning in the fire of lust. The Father is making them cool with the rain of knowledge. Just as the earth becomes cool with rain, similarly, with the rain of knowledge you become cool for 21 births. Then, no type of fire remains. Even the elements become satopradhan and no heat is experienced.

Essence for dharna:
1. Maintain the intoxication of the spiritual study. Become as egoless as the Father. Don’t have any ego about your position, etc.
2. Fill your aprons with the jewels of knowledge. Become completely viceless and attain the deity status. Never wilt.

Blessing: May you keep your register clean with the power of silence and be loved by the divine family and by God.
Such an invention has been created through science with which anything written can be erased such that you can’t even tell it was there. Similarly, clean your register with the power of silence every day and you will be loved by God and the divine family. Everyone loves honesty and cleanliness. Therefore, let there not be any leakage of wasteful thoughts or deeds from one day to the next. Let the past be the past and put a full stop and the register will become clean and the Lord will be pleased.

Slogan: To have waste thoughts or to be an instrument who creates waste thoughts in others too

Hindi

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – बाप आये हैं सार दुनिया से विकारों की तपत बुझाए सबको शीतल बनाने, ज्ञान बरसात शीतल बना देती है”
प्रश्न:- कौन सी तपत सार दुनिया को जला रही है?
उत्तर:- काम विकार की तपत सार दुनिया को जला रही है। सब काम अग्नि में जलकर काले हो गये हैं। बाप ज्ञान वर्षा से उन्हें शीतल बनाते हैं। जैसे बरसात पड़ने से धरती शीतल हो जाती है तो इस ज्ञान वर्षा से 21 जन्मों के लिए तुम शीतल बन जाते हो। किसी भी प्रकार की तपत नहीं रहती। तत्व भी सतोप्रधान बन जाते हैं। कोई भी तपते नहीं हैं।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) रूहानी पढ़ाई के नशे में रहना है। बाप समान निरहंकारी बनना है। पोजीशन आदि का अंहकार नहीं रखना है।
2) अपनी झोली ज्ञान रत्नों से भरनी है। सम्पूर्ण निर्विकारी बन देवता पद पाना है। कभी भी मुरझाना नहीं है।
वरदान:- साइलेन्स की शक्ति द्वारा अपने रजिस्टर को साफ करने वाले लोकप्रिय, प्रभू प्रिय भव
जैसे साइन्स ने ऐसी इन्वेन्शन की है जो लिखा हुआ सब मिट जाए, मालूम न पड़े। ऐसे आप साइलेन्स की शक्ति से अपने रजिस्टर को रोज साफ करो तो प्रभू प्रिय वा दैवी लोक प्रिय बन जायेंगे। सच्चाई सफाई को सभी पसन्द करते हैं इसलिए एक दिन के किये हुए व्यर्थ संकल्प वा व्यर्थ कर्म की दूसरे दिन लीक भी न रहे, बीती को बीती कर फुलस्टाप लगा दो तो रजिस्टर साफ रहेगा और साहेब राजी हो जायेगा।
स्लोगन:- व्यर्थ संकल्प करना वा दूसरों के व्यर्थ संकल्प चलाने के निमित्त बनना-यह भी अपवित्रता है।

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