29 August 2016 Murli

English

Essence: Sweet children, continue to perform the drill of “Manmanabhav” and you will become ever-healthy for 21 births.

Question: To follow which shrimat of the Satguru requires incognito effort?
Answer: The shrimat of the Satguru is: Sweet children, forget your body and remember Me. Consider yourself to be only a soul. Make effort to remain soul conscious. Give everyone the message: Become bodiless! Forget your body and all bodily religions and you will become pure. You children have to make incognito effort to follow this shrimat. Only the fortunate children are able to make this incognito effort.

Essence for dharna:
1. In order to become pure, practise being bodiless. Give everyone the message to remember the one Father. Forget everything including your body.
2. Study yoga with Yogeshwar Father and become a true yogi. Through knowledge become wealthy and through yoga become free from disease and ever healthy.

Blessing: May you be obedient and an image that grants visions by putting every teaching into the practical form and giving the proof of that.
The children who do not keep the teachings just in their intellects, but put them into their form remain stable in the stage of an embodiment of knowledge, an embodiment of love and an embodiment of bliss. Those who put every point of knowledge into their being will be able to remain stable in the point form. It is easy to churn, that is, to speak about the point, but to be that form and enable other souls to experience that form is to give the proof, that is, to be obedient and an image that grants visions.

Slogan: Increase the power of concentration and the wanderings of the mind and intellect will stop.

Hindi

“मीठे बच्चे – मनमनाभव की ड्रिल सदा करते रहो तो 21 जन्मों के लिए रूस्ट-पुस्ट (निरोगी) बन जायेंगे”
प्रश्न:- सतगुरू की कौन सी श्रीमत पालन करने में ही गुप्त मेहनत है?
उत्तर:- सतगुरू की श्रीमत है – मीठे बच्चे, इस देह को भी भूल कर मुझे याद करो। अपने को अकेली आत्मा समझो। देही-अभिमानी रहने का पुरूषार्थ करो। सबको यही पैगाम दो कि अशरीरी बनो। देह सहित देह के सब धर्मो को भूलो तो तुम पावन बन जायेंगे। इस श्रीमत को पालन करने में बच्चों को गुप्त मेहनत करनी पड़ती है। तकदीरवान बच्चे ही यह गुप्त मेहनत कर सकते हैं।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) पावन बनने के लिए अशरीरी बनने का अभ्यास करना है। सबको पैगाम देना है कि एक बाप को याद करो। देह सहित सब कुछ भूल जाओ।
2) योगेश्वर बाप से योग सीखकर सच्चा-सच्चा योगी बनना है। ज्ञान से धनवान और योग से निरोगी, एवरहेल्दी बनना है।
वरदान:- हर शिक्षा को स्वरूप में लाकर सबूत देने वाले सपूत वा साक्षात्कार मूर्त भव
जो बच्चे शिक्षाओं को सिर्फ शिक्षा की रीति से बुद्धि में नहीं रखते, लेकिन उन्हें स्वरूप में लाते हैं वह ज्ञान स्वरूप, प्रेम स्वरूप, आनंद स्वरूप स्थिति में स्थित रहते हैं। जो हर प्वाइंट को स्वरूप में लायेंगे वही प्वाइंट रूप में स्थित हो सकेंगे। प्वाइंट का मनन अथवा वर्णन करना सहज है लेकिन स्वरूप बन अन्य आत्माओं को भी स्वरूप का अनुभव कराना – यही है सबूत देना अर्थात् सपूत वा साक्षात्कार मूर्त बनना।
स्लोगन:- एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाओ तो मन-बुद्धि का भटकना बंद हो जायेगा।

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