03 August 2015 Murli

English

Essence: Sweet children, by following devilish dictates, you became homeless. Now, by following God’s directions, you will go to the land of happiness.

Question: What hopes should you children have in the Father and what hopes should you not have in the Father?
Answer: The only hope you must have in the Father is that you will be made pure by the Father and go back to your home and kingdom. Baba says: Children, don’t hope that I will give blessings to someone who is ill. There is no question of mercy or blessings here. I have come to make you children pure from impure. I am now teaching you such actions that you will not perform any more sinful actions.

Song: If not today, then, tomorrow, these clouds will disperse.

Essence for dharna:
1. Every action should be an elevated action according to shrimat. Don’t cause anyone sorrow. Imbibe divine virtues. Only follow the Father’s directions.
2. In order to remain constantly cheerful, spin the discus of self-realisation. Never become like salt water. Give everyone the Father’s introduction. Become very, very sweet.

Blessing: May you be full of success by understanding the alokik languages with the practice of introspection.
The more you children remain stable in your introspective form of sweet silence, the easier you will be able to understand the language of the eyes, the language of feelings and the language of thoughts. These three languages are the languages of a spiritual yogi life. These alokik languages are very powerful. According to the time, only through these three languages will you easily achieve success. Therefore, practise these spiritual languages.

Slogan: Become so light that the Father sits you on His eyelids and takes you back with Him.

Hindi

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – तुम आसुरी मत पर चलने से दरबदर हो गये, अब ईश्वरीय मत पर चलो तो सुखधाम चले जायेंगे”
प्रश्न:- बच्चों को बाप से कौन सी उम्मीद रखनी है, कौन सी नहीं?
उत्तर:- बाप से यही उम्मीद रखनी है कि हम बाप द्वारा पवित्र बन अपने घर और घाट (राजधानी) में जायें। बाबा कहते हैं – बच्चे, मेरे में यह उम्मीद नहीं रखो कि फलाना बीमार है, आशीर्वाद मिले। यहाँ कृपा या आशीर्वाद की बात ही नहीं है। मैं तो आया हूँ तुम बच्चों को पतित से पावन बनाने। अब मैं तुमको ऐसे कर्म सिखलाता हूँ जो विकर्म न बनें।
गीत:- आज नहीं तो कल बिखरेंगे यह बादल……..
धारणा के लिए मुख्य सार :-
1) श्रीमत पर अब हर कर्म श्रेष्ठ करना है, किसी को भी दु:ख नहीं देना है, दैवीगुण धारण करने हैं। बाप के डायरेक्शन पर ही चलना है।
2) सदैव हर्षित रहने के लिए स्वदर्शन चक्रधारी बनना है, कभी लूनपानी नहीं होना है। सबको बाप का परिचय देना है। बहुत-बहुत मीठा बनना है।
वरदान:- अन्तर्मुखता के अभ्यास द्वारा अलौकिक भाषा को समझने वाले सदा सफलता सम्पन्न भव
जितना-जितना आप बच्चे अन्तर्मुखी स्वीट साइलेन्स स्वरूप में स्थित होते जायेंगे उतना नयनों की भाषा, भावना की भाषा और संकल्प की भाषा को सहज समझते जायेंगे। यह तीन प्रकार की भाषा रूहानी योगी जीवन की भाषा है। यह अलौकिक भाषायें बहुत शक्तिशाली हैं। समय प्रमाण इन तीनों भाषाओं द्वारा ही सहज सफलता प्राप्त होगी इसलिए अब रूहानी भाषा के अभ्यासी बनो।
स्लोगन:- आप इतने हल्के बन जाओ जो बाप आपको अपनी पलकों पर बिठाकर साथ ले जाए।

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