17 April 2015 Murli

English

Essence: Sweet children, now that the play is coming to an end you will have to return home. Therefore, finish all your attachment to this world. Remember your home and the new kingdom.

Question: When is a donation important? Which children receive the return of such a donation?
Answer: A donation is important when you have no attachment to that which you donate. If you make a donation and then remember whatever you have given, you cannot receive any return for that. Donations are made for a return in the next birth. Therefore, finish all attachment to whatever you have in this birth. Look after everything as a trustee. Whatever you use for God’s service here, however many hospitals and colleges you open through which many will benefit, you will receive the return of that for 21 births.

Essence for dharna:
1. Remain busy with thoughts of your eternal self and your study. Do not look at others. If someone is not saying good things, listen through one ear and let it out of the other. Don’t sulk and stop studying.
2. Donate everything while alive and finish all your attachment. Will everything, become a trustee and remain light. Become soul conscious and imbibe all divine virtues.

Blessing: May you be free from all attractions and experience a constant and stable stage by remaining aware of the Father and service.
Just as a servant always remembers his service and his master, similarly, world servers, truly serviceable children, do not remember anything except the Father and service. It is only through this that you can experience staying in a constant and stable stage. Apart from the sweetness of the one Father, all other tastes seem tasteless. Because of your experience of the sweetness of the one Father, you cannot be attracted to anything. This intense effort for a constant and stable stage makes you free from all attractions. This is the elevated destination.

Slogan: In order to pass the paper of delicate situations, make your nature powerful.

Hindi

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – अब यह नाटक पूरा होता है, तुम्हें वापिस घर जाना है, इसलिए इस दुनिया से ममत्व मिटा दो, घर को और नये राज्य को याद करो”
पश्न:- दान का महत्व कब है, उसका रिटर्न किन बच्चों को प्राप्त होता है?
उत्तर:- दान का महत्व तब है जब दान की हुई चीज में ममत्व न हो। अगर दान किया फिर याद आया तो उसका फल रिटर्न में प्राप्त नहीं हो सकता। दान होता ही है दूसरे जन्म के लिए इसलिए इस जन्म में तुम्हारे पास जो कुछ है उससे ममत्व मिटा दो। ट्रस्टी होकर सम्भालो। यहाँ तुम जो ईश्वरीय सेवा में लगाते हो, हॉस्पिटल वा कॉलेज खोलते हो उससे अनेकों का कल्याण होता है, उसके रिटर्न में 21 जन्मों के लिए मिल जाता है।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) स्वयं के चिंतन और पढ़ाई में मस्त रहना है। दूसरों को नहीं देखना है। अगर कोई अच्छा नहीं बोलता है तो एक कान से सुन दूसरे से निकाल देना है। रूठ करके पढ़ाई नहीं छोड़नी है।
2) जीते जी सब कुछ दान करके अपना ममत्व मिटा देना है। पूरा विल कर ट्रस्टी बन हल्का रहना है। देही-अभिमानी बन सर्व दैवीगुण धारण करने हैं।
वरदान:- बाप और सेवा की स्मृति से एकरस स्थिति का अनुभव करने वाले सर्व आकर्षणमुक्त भव
जैसे सर्वेन्ट को सदा सेवा और मास्टर याद रहता है। ऐसे वर्ल्ड सर्वेन्ट, सच्चे सेवाधारी बच्चों को भी बाप और सेवा के सिवाए कुछ भी याद नहीं रहता, इससे ही एकरस स्थिति में रहने का अनुभव होता है। उन्हें एक बाप के रस के सिवाए सब रस नीरस लगते हैं। एक बाप के रस का अनुभव होने के कारण कहाँ भी आकर्षण नहीं जा सकती, यह एकरस स्थिति का तीव्र पुरूषार्थ ही सर्व आकर्षणों से मुक्त बना देता है। यही श्रेष्ठ मंजिल है।
स्लोगन:- नाजुक परिस्थितियों के पेपर में पास होना है तो अपनी नेचर को शक्तिशाली बनाओ।

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