30 August 2016 Murli

English

Essence: Sweet children, you know the incognito secret of the drama, of how this confluence age is the age of ascending and that the degrees then continue to decrease from the golden age.

Question: What is the most elevated service and who can do that service?
Answer: To make Bharat into heaven, to make beggars into princes and impure ones pure is the most elevated service. No one but the one Father can do such service. It is because the Father did such elevated service that children maintain His honour. First of all, you build the Somnath Temple to Him and worship Him.

Song: At last the day for which we had been waiting has come.

Essence for dharna:
1. While keeping the knowledge of the Creator and creation in your intellect, make effort to become satopradhan. Only have the one concern that you definitely have to become satopradhan.
2. Keep this unlimited drama in your intellect and maintain infinite happiness. In order to attain honour equal to the Father’s, do the service of making impure ones pure.

Blessing: May you be one who rules the hearts of all souls with love and thereby claims a right to the kingdom of the world.
The children who currently rule the hearts of all souls with love are the ones who claim a right to the kingdom of the world in the future. You must not order anyone at this time; you cannot become a world emperor now. Now, you have to be a world server and give love. Check to see how much love you have accumulated in your future account. In order to become a world emperor, you do not just have to be a bestower of knowledge, but you also have to give everyone love, that is, co-operation.

Slogan: When you feel tired, dance in happiness and your mood will change.

Hindi

“मीठे बच्चे – तुम ड्रामा के गुप्त रा॰ज को जानते हो कि यह संगमयुग ही चढ़ती कला का युग है, सतयुग से लेकर कलायें कम होती जाती हैं”
प्रश्न:- सबसे उत्तम सेवा कौन सी है और वह सेवा कौन करता है?
उत्तर:- भारत को स्वर्ग बनाना, रंक को राव बनाना, पतित को पावन बनाना – यह है सबसे उत्तम सेवा। ऐसी सेवा एक बाप के सिवाए और कोई भी नहीं कर सकता। बाप ने ऐसी महान सेवा की है तब तो बच्चे उनकी इज्जत करते हैं, सबसे पहले सोमनाथ का मन्दिर बनाकर उनकी पूजा करते हैं।
गीत:- आखिर वह दिन आया आज….
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) रचयिता और रचना का ज्ञान बुद्धि में रख सतोप्रधान बनने का पुरूषार्थ करना है। बस एक ही चिंता रखनी है कि हमें सतोप्रधान जरूर बनना है।
2) इस बेहद के ड्रामा को बुद्धि में रख अपार खुशी में रहना है, बाप समान इज्जत पाने के लिए पतितों को पावन बनाने की सेवा करनी है।
वरदान:- सर्व आत्माओं पर स्नेह का राज्य करने वाले विश्व राज्य अधिकारी भव
जो बच्चे वर्तमान समय सर्व आत्माओं के दिल पर स्नेह का राज्य करते हैं वही भविष्य में विश्व के राज्य का अधिकार प्राप्त करते हैं। अभी किसी पर आर्डर नहीं चलाना है। अभी से विश्व महाराजन नहीं बनना है, अभी विश्व सेवाधारी बनना है, स्नेह देना है। देखना है कि अपने भविष्य के खाते में स्नेह कितना जमा किया है। विश्व महाराजन बनने के लिए सिर्फ ज्ञान दाता नहीं बनना है इसके लिए सबको स्नेह अर्थात् सहयोग दो।
स्लोगन:- जब थकावट फील हो तो खुशी में डांस करो, इससे मूड चेंज हो जायेगी।

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