01 July 2016 Murli

English

Essence: Sweet children, there is no one as egoless or altruistic a server as the Father. He gives you children the sovereignty of the whole world and He Himself goes into retirement.

Question: What is the Father’s message that you children have to give to the whole world?
Answer: Tell everyone: You are the children of the Remover of Sorrow and the Bestower of Happiness. Therefore, never cause anyone sorrow. Remember the Father, the Bestower of Happiness, and follow Him and you will go to the land of happiness for half the cycle. Give everyone this message. Those who imbibe this message in their lives will be liberated for 21 births from being made unconscious by Maya.

Song: Our pilgrimage is unique.

Essence for dharna:
1. Become as obedient as the Father. Don’t show your arrogance in any situation. Remain incorporeal and egoless.
2. Understand the contrast between the Father, the Teacher and the Satguru. Have faith in the intellect and follow shrimat. Stay on the spiritual pilgrimage.

Blessing: May you be a lawmaker and so a new world maker by being lawful towards yourself and towards all souls.
Only those who are lawful towards themselves can be lawful towards others. Those who break the law themselves cannot uphold the law for others. Therefore, look at yourself and check that you do not break the law in any way from morning till night through your thoughts, words, deeds or connections, in giving co-operation to one another or in service. Those who are lawmakers cannot be the lawbreakers. Those who become lawmakers at the present time become peace makers and new world makers.

Slogan: Not to be influenced by the good or bad results of your actions is to be karmateet.

Hindi

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – बाप जैसा निरहंकारी और निष्काम सेवाधारी कोई नहीं, सारे विश्व की बादशाही बच्चों को देकर खुद वानप्रस्थ में बैठ जाते हैं”
प्रश्न:- बाप का कौन सा पैगाम तुम्हें सारे विश्व को बताना है?
उत्तर:- सभी को बताओ कि तुम दु:ख हर्ता सुख कर्ता के बच्चे हो। तुम्हें कभी भी किसी को दु:ख नहीं देना है। तुम सुखदाता बाप को याद करो, उन्हें फालो करो तो आधाकल्प के लिए सुखधाम में चले जायेंगे। यह पैगाम सबको देना है। जो इस पैगाम को जीवन में धारण करेंगे वह 21 जन्मों के लिए माया की बेहोशी से छूट जायेंगे।
गीत:- हमारे तीर्थ न्यारे हैं…
धारणा के लिए मुख्य सार :-
1) बाप समान ओबीडियन्ट बनना है। कभी भी किसी बात में अपना अहंकार नहीं दिखाना है। निराकारी और निरहंकारी होकर रहना है।
2) बाप, टीचर और सतगुरू के कान्ट्रास्ट को समझ निश्चयबुद्धि बन श्रीमत पर चलना है। रूहानी यात्रा पर रहना है।
वरदान:- अपने प्रति वा सर्व आत्माओं के प्रति लॉ फुल बनने वाले लॉ मेकर सो न्यु वर्ल्ड मेकर भव
जो स्वयं प्रति लॉ फुल बनते हैं वही दूसरों के प्रति भी लॉ फुल बन सकते हैं। जो स्वयं लॉ को ब्रेक करते हैं वह दूसरों के ऊपर लॉ नहीं चला सकते इसलिए अपने आपको देखो कि सवेरे से रात तक मन्सा संकल्प में, वाणी में, कर्म में, सम्पर्क वा एक दो को सहयोग देने में वा सेवा में कहाँ भी लॉ ब्रेक तो नहीं होता है! जो लॉ मेकर हैं वह लॉ ब्रेकर नहीं बन सकते। जो इस समय लॉ मेकर बनते हैं वही पीस मेकर, न्यु वर्ल्ड मेकर बन जाते हैं।
स्लोगन:- कर्म करते कर्म के अच्छे वा बुरे प्रभाव में न आना ही कर्मातीत बनना है।

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