31 March 2015 Murli

English

Essence: Sweet children, you have to purify the entire world with the power of yoga. By conquering Maya with the power of yoga you can become the conquerors of the world.

Question: What is the Father’s part? On what basis have you children recognised that part?
Answer: The Father’s part is to remove everyone’s sorrow and bestow happiness, to release everyone from the chains of Ravan. The night of devotion ends when the Father comes. The Father Himself gives you His own introduction and also the introduction of His property. By knowing the one Father you come to know everything.

Song: You are the Mother and You are the Father.

Essence for dharna:
1. Make the soul satopradhan by removing all your iron-aged bondages of karma from your intellect and by donating the five vices. Maintain the pure pride of silence.
2. Use your body, mind and wealth in a worthwhile way by sacrificing them with happiness into this sacrificial fire of Rudra. Give everything to the Father at this present time and claim your kingdom for 21 births from the Father.

Blessing: May you constantly be an embodiment of power and fill weak souls with power through your good wishes.
The special service of you serviceable children is to remain embodiments of power yourselves and to make everyone an embodiment of power, that is, to fill weak souls with power. For this, always be an embodiment of good wishes and elevated feelings. Good wishes does not mean that you have pure feelings for others such that you become emotional. Do not make this mistake. Let your good wishes also be unlimited. To have special feelings for one is damaging. Therefore, have an unlimited stage and, on the basis of the powers you have attained, become an embodiment of power.

Slogan: The ornaments are the decoration of Brahmin life; therefore, be one holding the ornaments, not one who has arrogance.

Hindi

मुरली सार:- “मीठे बच्चे-तुम्हें अपने योगबल से सारी सृष्टि को पावन बनाना है, तुम योगबल से ही माया पर जीत पाकर जगतजीत बन सकते हो”
प्रश्न :- बाप का पार्ट क्या है, उस पार्ट को तुम बच्चों ने किस आधार पर जाना है?
उत्तर :- बाप का पार्ट है-सबके दु:ख हरकर सुख देना, रावण की जंजीरों से छुड़ाना। जब बाप आते हैं तो भक्ति की रात पूरी होती है। बाप तुम्हें स्वयं अपना और अपनी जायदाद का परिचय देते हैं। तुम एक बाप को जानने से ही सब कुछ जान जाते हो।
गीत:- तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो……..
धारणा के लिए मुख्य सार :-
1) कलियुगी सर्व कर्मबन्धनों को बुद्धि से भूल 5 विकारों का दान कर आत्मा को सतोप्रधान बनाना है। एक ही साइलेन्स के शुद्ध घमण्ड में रहना है।
2) इस रूद्र यज्ञ में खुशी से अपना तन-मन-धन सब अर्पण कर सफल करना है। इस समय सब कुछ बाप हवाले कर 21 जन्मों की बादशाही बाप से ले लेनी है।
वरदान:- अपनी शुभ भावना द्वारा निर्बल आत्माओं में बल भरने वाले सदा शक्ति स्वरूप भव
सेवाधारी बच्चों की विशेष सेवा है-स्वयं शक्ति स्वरूप रहना और सर्व को शक्ति स्वरूप बनाना अर्थात् निर्बल आत्माओं में बल भरना। इसके लिए सदा शुभ भावना और श्रेष्ठ कामना स्वरूप बनो। शुभ भावना का अर्थ यह नहीं कि किसी में भावना रखते-रखते उसके भाववान हो जाओ। यह गलती नहीं करना। शुभ भावना भी बेहद की हो। एक के प्रति विशेष भावना भी नुकसानकारक है इसलिए बेहद में स्थित हो निर्बल आत्माओं को अपनी प्राप्त हुई शक्तियों के आधार से शक्ति स्वरूप बनाओ।
स्लोगन:- अलंकार ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार हैं-इसलिए अलंकारी बनो देह अहंकारी नहीं।

 

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