30 March 2015 Murli

English

Essence: Sweet children, the happiness of this old world is only momentary and will not go with you. It is the imperishable jewels of knowledge that go with you. Therefore, accumulate your imperishable income.

Question: What are you not taught in the study that the Father teaches you?
Answer: You are not taught occult power. Reading someone’s thoughts is occult power. You are not taught that knowledge. The Father is not a thought reader. He is called Janijananhar (Knower of all secrets), that is, He is knowledge-full. The Father comes to teach you this spiritual study through which you claim the kingdom of the world for 21 births.

Essence for dharna:
1. In order to experience limitless happiness through having loving remembrance of the Father, you must keep the line of your intellect clear. Souls become satopradhan when remembrance takes the form of fire.
2. In return for your shells, the Father gives you jewels. Fill your aprons from such an Innocent Lord. Attain salvation by studying the study of remaining in silence.

Blessing: May you be an avyakt angel who creates a powerful atmosphere by making spiritual endeavour for the avyakt form.
The way to make the atmosphere powerful is to make spiritual endeavour for the avyakt form. Repeatedly pay attention to this because whatever you are making spiritual endeavour for, your attention stays on that. Spiritual endeavour for the avyakt form means to have tapasya of repeatedly paying attention. Therefore, keeping the blessing of “May you be an avyakt angel” in your awareness, do tapasya to make the atmosphere powerful. Then, whoever comes in front of you will go beyond any gross or wasteful matters.

Slogan: Increase the power of concentration to reveal the Almighty Authority Father.

Hindi

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – इस पुरानी दुनिया में अल्पकाल क्षण भंगुर सुख है, यह साथ नहीं चल सकता, साथ में अविनाशी ज्ञान रत्न चलते हैं, इसलिए अविनाशी कमाई जमा करो”

प्रश्न:- बाप की पढ़ाई में तुम्हें कौन-सी विद्या नहीं सिखाई जाती है?
उत्तर:- भूत विद्या। किसी के संकल्पों को रीड करना, यह भूत विद्या है, तुम्हें यह विद्या नहीं सिखाई जाती। बाप कोई थॉट रीडर नहीं है। वह जानी जाननहार अर्थात् नॉलेजफुल है। बाप आते हैं तुम्हें रूहानी पढ़ाई पढ़ाने, जिस पढ़ाई से तुम्हें 21 जन्मों के लिए विश्व की राजाई मिलती है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप की याद से अपार सुखों का अनुभव करने के लिए बुद्धि की लाइन क्लीयर चाहिए। याद जब अग्नि का रूप ले तब आत्मा सतोप्रधान बनें।
2) बाप कौड़ियों के बदले रत्न देते हैं। ऐसे भोलानाथ बाप से अपनी झोली भरनी है। शान्त में रहने की पढ़ाई पढ़ सद्गति को प्राप्त करना है।

वरदान:- अव्यक्त स्वरूप की साधना द्वारा पावरफुल वायुमण्डल बनाने वाले अव्यक्त फरिश्ता भव
वायुमण्डल को पावरफुल बनाने का साधन है अपने अव्यक्त स्वरूप की साधना। इसका बार-बार अटेन्शन रहे क्योंकि जिस बात की साधना की जाती है उसी बात का ध्यान रहता है। तो अव्यक्त स्वरूप की साधना अर्थात् बार-बार अटेन्शन की तपस्या चाहिए इसलिए अव्यक्त फरिश्ता भव के वरदान को स्मृति में रख शक्तिशाली वायुमण्डल बनाने की तपस्या करो तो आपके सामने जो भी आयेगा वह व्यक्त और व्यर्थ बातों से परे हो जायेगा।

स्लोगन:- सर्व शक्तिमान् बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाओ।

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